दानी और भक्त सेठ हरगुलाल बेरीवाला

ब्रज में धार्मिक कार्यों के लिए धन का दान करने वाले बहुत सेठ हुए हैं। यहां का हर धर्मस्थल अपने […]

भक्त, भिक्षुक और जमींदार ‘लाला बाबू’

ब्रज में एक ऐसे भी भक्त का आगमन जो खानदानी जमींदार थे। इन्होंने यहां मन्दिर, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र बनवाये। इनकी व्यवस्था […]

मथुरा जिले से प्रकाशित पुराने पत्र पत्रिकाएं

मथुरा जिले के सबसे पहले प्रकाशित होने वाला पत्र था नैरंग मज़ामिन (Nairang Mazamin), जो एक मासिक अखबार था यह […]

नंदीश्वर पर्वत पर बने नंदभवन की शोभा है न्यारी

नंदगांव को भला कौन नहीं जानता? ब्रजवास के दौरान श्रीकृष्ण ने यहीं निवास किया था। उनकी अनेक लीलाओं के साक्षी […]

श्रीकृष्ण के जीवन की घटनाओं का कालक्रम

श्रीकृष्ण के जीवन की प्रमुख घटनाओं का कालक्रम : 1. जन्म और गोकुल आगमन।(संवत 3128 विक्रमी पूर्व, भाद्रपद कृष्ण 8, […]

कीर्ति मन्दिर : बरसाना में बना राधा रानी की माँ का मंदिर

कीर्ति महारानी यानी राधा रानी की माँ। बरसाना में राधा रानी का मंदिर है। उनके पिता वृषभानु जी का मंदिर […]

दिव्य यशोदा कुंड और जीर्ण हाऊ-बिलाऊ

यशोदा कुंड नन्दगांव में स्थित है। इस कुंड का बड़ा महत्त्व है। यह श्रीकृष्ण की माँ के नाम पर है। […]

चरण पहाड़ी पर अंकित हैं श्रीकृष्ण के चरण चिन्ह

नन्दगांव में चरण पहाड़ी है। चरण पहाड़ी जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़े। यहां उनके चरण चिन्ह भी अंकित हैं। यहां […]

इस बर्तन में दही को बिलोकर माखन निकालती थीं यशोदा मैया

नंदगांव यानी कृष्ण का गांव। यहां तो पग-पग पर कृष्ण के चिन्ह मिलने ही हैं। नन्दबैठक के पास ही है […]

उद्धव क्यारी : जहां गोपियों के समक्ष धराशाई हुआ उद्धव का ज्ञान

ज्ञानी गुमानी धनी जाओ रे यहां से, यहां तो राज बावरे ठाकुर को। बैजू बावरा की यह पंक्तियां ब्रज का […]

कान्हा को प्रिय है पनिहारी कुंड का पानी

भारत के किसी गांव का चित्र बनाएं तो बिना पनघट के वह अधूरा होगा। सिर पर मटकियों में जल भर […]

नन्द बैठक : जहां हुआ था इंद्र के खिलाफ निर्णय

नंदगांव नंदबाबा का गांव है। कृष्ण का गांव है। उनका जन्म मथुरा में हुआ। बचपन के कुछ दिन गोकुल में […]

नंदगांव की वृंदा देवी : जिसने दिया धर्मराज को श्राप

वृंदा कुंड नंदगांव में स्थित एक रमणीक सरोवर है। वृंदा यानी तुलसी की लहलहाती क्यारी से आती महक और कुंड […]

ब्रज में भी विराजते हैं बाबा केदारनाथ

वयोवृद्ध नंदबाबा और यशोदा मैया ने जब चारों धामों की यात्रा करने का निर्णय किया तो श्रीकृष्ण ने उन्हें इस […]

कुसुम सरोवर और सूरजमल की छतरी

गोवर्धन की सप्तकोसी परिक्रमा के बारे में तो आपने सुना ही होगा। यह सात कोस (21 किमी) की दूरी है […]

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