भारतीय इतिहास में दस्तावेजी हेर फेर का इतिहास

दस्तावेजों में हेर फेर करके या जाली दस्तावेज बनाकर शासन से लाभ लेने की घटनाएं हम अक्सर अपने परिवेश में देखते रहते हैं। कोई फर्जी […]

राजपूतों का इतिहास लिखकर अमर हुए कर्नल जेम्स टॉड की कहानी

17 वर्ष की उम्र में भारत आया था जेम्स कर्नल जेम्स टॉड का जन्म इंग्लैंड के इस्लिंगटन नगर में 20 मार्च 1782 ईस्वी को एक […]

भरतपुर की कहानी : भाग पांच (थून की गढ़ी का निर्माण और चूरामन की शक्ति का विस्तार)

पिछले भागों में हमने ब्रजमंडल के किसानों की स्वाधीनता की प्रवृत्ति से उपजे मुगल सत्ता के विरोध के प्रमुख नायक बने गोकुला, राजाराम और जोरावर […]

भरतपुर की कहानी : भाग चार (शहजादा बेदारबख्त का अभियान और सिनसिनी की गढ़ी का पतन)

पिछले भागों में हमने ब्रजमंडल के किसानों की स्वाधीनता की प्रवृत्ति से उपजे मुगल सत्ता के विरोध के प्रमुख नायक बने गोकुला और राजाराम के […]

भरतपुर की कहानी भाग तीन (राजाराम ने अकबर की कब्र खोद कर अस्थियां जला दीं)

पिछले अंकों में हमने जाना कि किस तरह शाहजहाँ के शासनकाल में उसकी हिन्दू विरोधी नीतियों के कारण ब्रजमंडल के किसानों ने क्रांति की मशाल […]

मथुरा शहर का एक ऐतिहासिक कुआं : सप्तसमुद्री कूप

लक्ष्मीनारायण तिवारी (वरिष्ठ इतिहासकार) पिछले दिनों मैं जब राजकीय संग्रहालय , मथुरा के परिसर में दोपहर के वक्त खड़ा गुनगुनी धूप सेंक रहा था, तब […]

रेडक्लिफ ने गुरदासपुर भारत को देकर खोल दिया कश्मीर का रास्ता

आज की कहानी है एक ऐसे अंग्रेज की है जिसने कागज के नक्शे पर लकीर खींच कर भारत और पाकिस्तान की सरहदें तय कर दी […]

भरतपुर की कहानी भाग दो (ब्रज को दासता से मुक्त कराने को बलिदान हो गया गोकुला)

पिछले अंक में हमने जाना कि किस तरह आगरा से दिल्ली के मध्य की भूमि पर जाट किसानों ने अपनी जमींदारियां स्थापित कीं और किस […]

भरतपुर की कहानी : भाग एक (शाहजहां की नीतियों के विरोध में बागी हो गया ब्रज क्षेत्र)

कहने को तो इस लेखमाला को भरतपुर की कहानी का नाम दिया गया है पर इसकी शुरुआत भरतपुर नगर और भरतपुर रियासत के बनने से […]

महाराजा सूरजमल की सबसे पहली राजधानी डीग का इतिहास और भवन विन्यास

राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित डीग वह नगर है जहां से महाराजा बदनसिंह ने एक छोटी सी राजनीतिक शुरुआत की और देखते ही देखते […]

हिन्दू प्रतिमाएं और मथुरा कला का विकास

  मथुरा कला के अंतर्गत उस दौर के कारीगरों ने हिन्दू, जैन और बौद्ध तीनों ही धर्मों से सम्बंधित देव-प्रतिमाओं का निर्माण बड़े पैमाने पर […]

हुमायूंनामा और गुलबदन बेगम

गुलबदन बेगम द्वारा लिखित हुमायूंनामा मुगलों के इतिहास के अध्ययन का एक प्रमुख स्रोत है। यह पुस्तक गुलबदन बेगम ने लिखी थी। गुलबदन बेगम हुमांयू की छोटी बहन थी। यह पुस्तक लंबे समय तक अज्ञात रही और बाद में प्रकाशित हुई।

वैर की कहानी : भाग दो

वैर की कहानी के पिछले भाग में हमने वैर की अवस्थिति, नामकरण, जाट शासन के दौरान प्रशासनिक प्रबन्ध, दुर्ग निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था आदि पर चर्चा […]

वैर की कहानी : भाग एक

“वैर की शोभा निराली है! चतुर्दिक वृक्ष गुल्म, अनेकों बाग, सरोवर विद्यमान हैं! चतुर्वर्ण के शूरवीर यहां निवास करते हैं! विशाल महल तथा गढ़ सौंदर्य […]

बयाना का इतिहास

बयाना एक अत्यंत प्राचीन स्थान है जो हमेशा से अपना खासा ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। यह उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जिसके आबाद […]

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