गाँधीजी की ब्रज यात्राएं

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ब्रज से लगाव रहा। वे कई बार यहां आए। इस वर्ष जब सारा राष्ट्र उनकी 150 […]

मथुरा जिले से प्रकाशित पुराने पत्र पत्रिकाएं

मथुरा जिले के सबसे पहले प्रकाशित होने वाला पत्र था नैरंग मज़ामिन (Nairang Mazamin), जो एक मासिक अखबार था यह […]

दो खामोश आंखें -32

योगेन्द्र सिंह छोंकर  गणेश जी का दूध पीना सागर जल मीठा होना रोटी प्याज़ वाली डायन कटे बैंगन में ॐ […]

मजदूर के लिए 2

योगेन्द्र सिंह छोंकर ओ मेरी रहनुमाई के दावेदारों जरा सुनो मेरी आवाज़ नहीं चाहिए मुझे धरती का राज गर सो […]

दो खामोश आंखें पीठ में सुराख किये जाती हैं

योगेन्द्र सिंह छोंकर दो खामोश ऑंखें मेरी पीठ में सुराख़ किए  जाती हैं! माना इश्क है खुदा क्यों मुझ काफ़िर को पाक […]

मत देख नज़र तिरछी करके

 योगेन्द्र सिंह छोंकर मत देख नज़र तिरछी करके मैं होश गंवाने वाला हूँ! अब तक मैं अनजान रहा कुदरत की इस नेमत से पा […]

दो खामोश आंखें – 31

योगेन्द्र सिंह छोंकर मंदिर हो या कोई मजार किसी नदी का पुल हो, कटोरा किसी भिखारी  का या शाहजहाँ की कब्र एक […]

दो खामोश आंखें – 30

योगेन्द्र सिंह छोंकर ज़बर के जूतों तले मसली जाने के बाद ज़माने के साथ साथ खुद अपनी आँखों से भी […]

दो खामोश आंखें – 29

योगेन्द्र सिंह छोंकर चंद गहने रुपये रंगीन टीवी या किसी दुपहिया की खातिर जल  भी जाती हैं दो खामोश ऑंखें

दो खामोश आंखें – 28

योगेन्द्र सिंह छोंकर कमनीय काया और करुण कोमल  कंठ  का मार्ग में  प्रदर्शन करने वाली कंजरी की ओर सिक्का उछालती हुई उसकी […]

दो खामोश आंखें – 27

योगेन्द्र सिंह छोंकर अपने बच्चे का निवाला कोयल कुल के कंठ में डालने वाले कौए को सदा ही दुत्कारती हैं दो […]

दो खामोश आंखें – 26

योगेन्द्र सिंह छोंकर ऊपर से एक वचन नीचे से बहु वचन बताती हैं पैजामे को पर देख लहंगे को पशोपेश […]

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