आसेश्वर महादेव नंदगांव


आसेश्वर नाम से ही झलकता है कि यह स्थान आशा पूर्ति से संबंधित है। पर यह आशा है किसकी?सबकी आशाओं की पूर्ति करने वाले शिव यहाँ एक आशा लेकर आये। आशा पूरी होने तक यहां तप किया और जब आशा पूरी हुई तो शिव आसेश्वर कहलाये। आज भी जो यहां कोई आशा लेकर जाता है तो उसकी आशा जरूर पूरी होती है।

क्या थी शिव की आशा

आसेश्वर महादेव मंदिर, नंदगांव।


देवों के देव महादेव शिव तो स्वयं सबकी आशाएं पूरी करते हैं फिर उनकी ऐसी कौनसी आशा थी जो यहां आकर पूरी हुई?श्रीकृष्ण का नंदभवन में आगमन हुआ। शिवजी श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए लालायित हो उठे। श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को देखने के लिए वे कैलाश पर्वत से नंदगांव चले आये। नंदगांव आकर उन्होंने नंदभवन के द्वार पर पुकार लगाई। द्वार पर भिक्षुक आया जानकर यशोदा मैया ने उन्हें भिक्षा देनी चाही। पर शिव तो श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहते थे।

शिव के औघड़ स्वरूप को देख मैया ने कर दिया मना



शिव जी का स्वरूप तो अद्भुत है ही। गले में सर्प और मस्तक पर गंगा। बदन पर भस्म और बाघम्बर का आवरण। मैया स्वयं इस वेश को देखकर भयभीत हो उठी थीं। जब बात आई लाला यानी श्रीकृष्ण के दर्शन की तो उन्होंने साफ मना कर दिया। बोली कि मेरा बच्चा तुम्हारा विकराल स्वरूप देखकर डर जाएगा।

निराश हो कर शिव बैठ गए तपस्या करने



मैया की मनाही सुनकर शिव बड़े निराश हुए। नंदगांव के पास ही वन में श्रीकृष्ण के दर्शन की आशा लेकर तपस्या करने बैठ गए।  इधर श्रीकृष्ण ने देखा कि शिव उनके दर्शन के लिए तपस्या कर रहे हैं तो उन्होंने लीला रची। श्रीकृष्ण जोर-जोर से रोने लगे। बालक को रोटा देखकर मैया बड़ी परेशान हो गई। उन्होंने लाला को चुप कराने के बड़े यत्न किये। पर श्रीकृष्ण चुप नहीं हुए। किसी ने मैया से कहा कि जो बाबा लाला के दर्शन के लिए आया था उसे बुलवा लो। शायद वह कोई जादू मंतर कर लाला को स्वस्थ करदे। 

शिवजी की खोज में दौड़े ब्रजवासी



मैया ने शिव की खोज में तमाम ब्रजवासियों को दौड़ा दिया। लोग शिवजी को खोजते हुए उस वन में पहुंचे जहां शिव जी तपस्या कर रहे थे। उन्होंने जाकर शिवजी से प्रार्थना कर कहा कि यशोदा मैया ने आपको नंदभवन में बुलाया है। शिव जी नंदभवन में पहुंचे।

राधा रानी का वर्णन कर श्रीकृष्ण को कराया चुप



बाबा रूपी शिव जी नंदभवन पहुंच गए। उन्होंने लाला के दर्शन किये। पर श्रीकृष्ण चुप होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। शिवजी उन्हें चुप कराने की युक्ति समझ गए। शिवजी ने राधा रानी का वर्णन करना शुरू कर दिया। राधा रानी के नाम-गुण आदि का वर्णन सुनकर श्रीकृष्ण मुस्कराने लगे। यह देखकर मैया समेत सभी ब्रजवासी बड़े प्रसन्न हो गए।

जहां शिव जी ने की थी तपस्या वहीं बना हुआ है मन्दिर

आसेश्वर महादेव के दर्शन।



वन में जिस स्थान पर शिवजी तपस्या करने बैठे थे उसी स्थान पर शिव मन्दिर बना हुआ है। यहां स्वयं प्रकट प्राचीन शिवलिंग है। इस स्थान का नाम आसेश्वर महादेव है। समीप ही आसेश्वर सरोवर है। मान्यता है कि इस सरोवर में स्नान कर आसेश्वर के दर्शन करने पर आशा पूरी होती हैं।

हर सोमवार को उमड़ते हैं श्रद्धालु

आसेश्वर सरोवर।



हर सोमवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि को यहां बड़ा उत्सव होता है। इस स्थान के प्रति लोगों में बड़ी श्रद्धा है। अक्सर लोग यहां भंडारों का आयोजन करते हैं।

कैसे पहुंचें



आसेश्वर महादेव मंदिर नंदगांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। जाने के लिए सड़क बनी हुई है। समीप ही टेर कदम्ब स्थित है।

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