दो खामोश आंखें – 5

योगेन्द्र सिंह छोंकर हो जाऊं जहाँ के लिए मसीहा या फिर कातिल मैं क्या हूँ जानती हैं बखूबी दो खामोश […]

दो खामोश आंखें – 3

योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे जाने का ख्याल मुझे दहशत नहीं देता मत समझना मैं तुम्हे दिल से नहीं लेता न […]

दो खामोश आंखें 2

योगेन्द्र सिंह छोंकर इत्तिला अपनी रवाग्नी की करते समय जो थी पीर चहरे पर तीस आवाज में लिख पाने में […]

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