भरतपुर के किले का नाम लोहागढ़ है। इस किले की बाहरी रक्षा दीवार पर आठ बुर्ज हैं। इन बुर्जों में सबसे अधिक प्रसिद्ध जवाहर बुर्ज […]
Author: Yogendra Singh Chhonkar
बरसाना आएं तो परिक्रमा अवश्य लगाएं
ब्रज के धर्म स्थलों पर परिक्रमा का महत्व होता है। गोवर्धन की गिरिराज परिक्रमा तो बहुत प्रसिद्ध है। मथुरा, वृंदावन आदि स्थानों पर भी परिक्रमा […]
मोती कुंड नंदगांव
नंदगांव का कण कण श्रीकृष्ण की लीलाओं का साक्षी है। यहां श्रीकृष्ण की हर उस लीला के चिन्ह हैं जिनका वर्णन पुराणों में किया गया […]
आसेश्वर महादेव नंदगांव
आसेश्वर नाम से ही झलकता है कि यह स्थान आशा पूर्ति से संबंधित है। पर यह आशा है किसकी?सबकी आशाओं की पूर्ति करने वाले शिव […]
टेर कदम्ब नंदगांव
टेर लगाना यानी आवाज लगाना या पुकारना। श्रीकृष्ण जब गाएं चराने वन में जाते थे तो एक कदम्ब के वृक्ष पर चढ़कर गायों को हेला […]
सुनहरा की कदम्बखण्डी
आज हम जिस पवित्र स्थल के बारे में बात कर रहे हैं वह है कदम्बखण्डी। कदम्बखण्डी यानी कदम्ब के वृक्षों से आच्छादित खण्ड। आज भी […]
पावन सरोवर, नंदगांव
नंदगांव ब्रज का ऐसा स्थान है जो प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। ब्रज भक्ति विलास ग्रंथ के अनुसार यहां 56 कुंड थे। आज भी दो […]
त्योहार नहीं संस्कृति है होली
अन्य स्थानों पर होली महज एक त्योहार है जो रंग-गुलाल से एक दूसरे को तर करके मना लिया जाता है पर ब्रज में होली एक […]
आर्यन पेशवा राजा महेंद्र प्रताप
द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को घिरा हुआ देखकर उस परिस्थिति का लाभ उठाकर भारत को स्वतंत्र कराने का स्वप्न नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देखा था। […]
दोमिल वन : जहां मिलते थे राधा-कृष्ण
बरसाना और नंदगांव के बीच स्थित है संकेत वन। संकेत राधा कृष्ण की प्रथम मिलन स्थली है। संकेत वन के अंतर्गत दोमिल वन स्थित है। […]
वो कुंड जिसमें राधा रानी ने धोए हल्दी से रंगे हाथ
बरसाना राधारानी का गांव है। यहां उनके माता-पिता के नाम पर अलग-अलग कुंड हैं। ये कुंड वृषभानु कुंड और कीर्ति कुंड कहे जाते हैं। यहां […]
महाराजा सूरजमल एक अजेय योद्धा
महाराजा सूरजमल अठारहवीं शताब्दी के एक महान शासक थे। विपरीत परिस्थितियों में उनका भाग्य नक्षत्र चमक उठा। अपनी कुशलता, योग्यता और वीरता के बल पर […]
दानी और भक्त सेठ हरगुलाल बेरीवाला
ब्रज में धार्मिक कार्यों के लिए धन का दान करने वाले बहुत सेठ हुए हैं। यहां का हर धर्मस्थल अपने पीछे किसी न किसी दानी […]
भक्त, भिक्षुक और जमींदार ‘लाला बाबू’
ब्रज में एक ऐसे भी भक्त का आगमन जो खानदानी जमींदार थे। इन्होंने यहां मन्दिर, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र बनवाये। इनकी व्यवस्था के लिये गांव भी खरीदे। […]
मथुरा जिले से प्रकाशित पुराने पत्र पत्रिकाएं
मथुरा जिले के सबसे पहले प्रकाशित होने वाला पत्र था नैरंग मज़ामिन (Nairang Mazamin), जो एक मासिक अखबार था यह 1883 ई. में प्रकाशित हुआ। […]
