दो खामोश आंखें -32

योगेन्द्र सिंह छोंकर 
गणेश जी का दूध पीना
सागर जल मीठा होना
रोटी प्याज़ वाली डायन
कटे बैंगन में ॐ
दीवार पर साईं
कितनी सहजता से
करती हैं स्वीकार  
दो खामोश आँखें

मजदूर के लिए 2

योगेन्द्र सिंह छोंकर ओ मेरी रहनुमाई के दावेदारों जरा सुनो मेरी आवाज़ नहीं चाहिए मुझे धरती का राज गर सो […]

दो खामोश आंखें -33

योगेन्द्र सिंह छोंकर  घर कहाँ मंदिर के सामने मंदिर कहाँ घर के सामने दोनों कहाँ आमने सामने कुछ बता कर […]

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