वो कुंड जिसमें राधा रानी ने धोए हल्दी से रंगे हाथ


बरसाना राधारानी का गांव है। यहां उनके माता-पिता के नाम पर अलग-अलग कुंड हैं। ये कुंड वृषभानु कुंड और कीर्ति कुंड कहे जाते हैं। यहां एक कुंड राधा रानी का भी है। इसका नाम राधा रानी के नाम पर न होकर प्रिया कुंड है। कृष्ण प्रिया राधिका के नाम से यह कुंड प्रिया कुंड कहा जाता है।

पीली पोखर भी कहते हैं लोग



बताते हैं कि इस कुंड के किनारे पर पीलू के वृक्षों की अधिकता थी। इस वजह से यह कुंड पीलू पोखर या पीली पोखर भी कहा जाता था। पीलू के वृक्ष अब विलुप्ति के कगार पर हैं। ब्रज के पौराणिक महत्त्व के स्थानों पर ये वृक्ष अब बहुत कम ही बचे हैं। इन वृक्षों का वर्णन राधा कृष्ण की लीलाओं में आता है। आज इन वृक्षों को संरक्षित किये जाने की जरूरत है। एक अन्य मान्यता यह है कि इस कुंड के जल में राधा रानी ने हल्दी से रंगे हाथ धोए थे। जिससे इस कुंड का जल पीला हो गया और यह पीली पोखर कहलाने लगा। कहते हैं यहां राधा रानी अपनी सखियों के संग स्नान करने को आती थीं।

भरतपुर राज्य के सेनापति ने कराया था जीर्णोद्धार



यह बात करीब ढाई सौ से पौने तीन सौ वर्ष पहले की है। भरतपुर राज्य के सेनापति थे मोहनराम बरसानियाँ। ये मोहनराम बरसाना के ही निवासी थे और लवानियां ब्राह्मण थे। मोहनराम ने इस कुंड के घाट पक्के कराए थे। 

हरगुलाल बेरीवालाh ने कराया पुनः जीर्णोद्धार



लगभग 80-90 वर्ष पूर्व यह कुंड पुनः बदहाल दशा में था। उन दिनों यह मिट्टी जमने के कारण अट गया था। इसके घाट नष्ट हो गए थे। यह कहा जा सकता है कि यहां कुंड के स्थान पर एक मैदान बन गया था। उस समय सेठ हरगुलाल बेरीवाला ने इस कुंड के खुदाई कराई। कुंड की खुदाई से निकली मिट्टी से बने टीले आज भी कुंड के चारों ओर देखे जा सकते हैं। उन्होंने इस कुंड के घाट फिर से पक्के कराए। इस कुंड के तट पर धर्मशाला भी बनवाई।

भादों के महीने में लगता है मेला



इस कुंड के तट पर एक मेला लगता है। यह मेला भादों के महीने में लगता है। जलविहार एकादशी के के के दिन द्वादशी को यह मेला लगता है। मेले मेंं जल विहार लीला की जाती है।

इस लीला में श्री राधा कृष्ण के विग्रहों को नौका में विराजमान कर जलविहार कराया जाता है। यह स्थानीय लोगों के मनोरंजन का अच्छा मेला है। बड़ी संख्या में लोग यह मेला देखने के लिए यहां जुटते हैं।

इसी कुंड के तट पर पाग बांधते हैं नंदगांव के हुरियारे


बरसाना की रंगीली होली की लीला में इस कुंड का महत्त्वपूर्ण स्थान है। नंदगांव से आने वाले हुरियारों का स्वागत यहीं किया जाता है। बरसाना के लोग इस कुंड के तट पर भांग ठंडाई की व्यवस्था रखते हैं। नंदगांव के हुरियारे यहां रुकते हैं। हुरियारिनों की लाठियों से अपने सिरों को बचाने के लिए वे यहीं रुक कर पाग बांधते हैं।

दानी और भक्त सेठ हरगुलाल बेरीवाला

ब्रज में धार्मिक कार्यों के लिए धन का दान करने वाले बहुत सेठ हुए हैं। यहां का हर धर्मस्थल अपने […]

दोमिल वन : जहां मिलते थे राधा-कृष्ण

बरसाना और नंदगांव के बीच स्थित है संकेत वन। संकेत राधा कृष्ण की प्रथम मिलन स्थली है। संकेत वन के […]

Leave a Reply

error: Content is protected !!