दो खामोश आंखें – 25 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर आधी रात के वक़्त बन संवर कर रेड लाइट एरिया में गाड़ियों की हेड लाइटों से चुंधियाती भी हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें पीठ में सुराख किये जाती हैं Yogendra Singh Chhonkar 4th March 2011 1 योगेन्द्र सिंह छोंकर दो खामोश ऑंखें मेरी पीठ में सुराख़ किए जाती हैं! माना इश्क है खुदा क्यों मुझ काफ़िर को पाक किए जाती हैं! भागता हूँ […]
साहित्य पर्यावरण गीत Yogendra Singh Chhonkar 5th June 2012 0 आओ हम सब मिल कर आज ये संकल्प उठाये वसन विहीन वसुंधरा को एक चादर हरी उढ़ाए रहे सदा से मित्र हमारे भू माँ के […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 5 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर हो जाऊं जहाँ के लिए मसीहा या फिर कातिल मैं क्या हूँ जानती हैं बखूबी दो खामोश ऑंखें