दो खामोश आंखें – 25 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर आधी रात के वक़्त बन संवर कर रेड लाइट एरिया में गाड़ियों की हेड लाइटों से चुंधियाती भी हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ खाक-पाए फखरेदीं हूँ मैं, अगर्चे शाह हूँ, उनका गुलामे-कमतरी हूँ मैं। बहादुर शाह मेरा नाम है मशहूर आलम में, व लेकिन ऐ […]
साहित्य सीमा रेखा के पार Yogendra Singh Chhonkar 22nd June 2023 0 कहानी पायल कटियार तेज वेग से बहती लहरों में आज एक उस कहानी का अंत हो गया जिसके चर्चे दूर-दूर तक फैले हुए थे। दर्दनाक […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 9 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जो बेखुदी न दे पाया तेरा मयखाना साकी दे गईं दो खामोश ऑंखें