दो खामोश आंखें – 20 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख पाऊँ दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 22 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य आखिर किसने की थी उस सात साल की मासूम लड़की की हत्या Yogendra Singh Chhonkar 19th October 2023 0 कहानी पायल कटियार रंगबिरंगी साड़ी पहने और काले दुपट्टे से अपना फेस कवर किये हुए करीब 35 वर्ष उम्र की उस महिला को पुलिस की […]
साहित्य मजदूर के लिए 1 Yogendra Singh Chhonkar 5th March 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर लाल किला है लाल लहू से मेरे ताज महल का संगेमरमर मेरे पसीने से चिपका है