दो खामोश आंखें – 21 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर कभी भटकाती कभी राह दिखाती कभी छिप जाती कभी आकर सामने अपनी ओर बुलाती मुझसे है खेलती या मुझे खिलाती दो खामोश ऑंखें
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]
साहित्य काला धन (नोटबंदी का भुगता खामियाजा) Yogendra Singh Chhonkar 27th August 2023 0 कहानी पायल कटियार कमला अपने पैसों को किसी डिब्बे में तो किसी अलमारी के बिछे कागजों के नीचे तो कभी तकियों के गिलाफ में छिपा-छिपाकर […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 3 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे जाने का ख्याल मुझे दहशत नहीं देता मत समझना मैं तुम्हे दिल से नहीं लेता न होऊंगा उदास पर करूँगा तलाश […]