दो खामोश आंखें – 22 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य पुत्रमोह में पागल एक दंपति का दर्द Yogendra Singh Chhonkar 29th August 2023 0 कहानी पायल कटियार (पुत्र के मोह में उसकी गलतियों को नज़रंदाज करने वाले माता-पिता को अंत में पछतावे के सिवा कुछ हाथ न लगा।) प्रवीन […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 3 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे जाने का ख्याल मुझे दहशत नहीं देता मत समझना मैं तुम्हे दिल से नहीं लेता न होऊंगा उदास पर करूँगा तलाश […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 14 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर चंद कतरे उनके लफ़्ज़ों के चंद हर्फ़ उनकी मुस्कराहट के वो मन भावन मिठास उनके जज्बात की सहेजने को ताउम्र मुझे सौंप […]