दो खामोश आंखें – 22 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य गुजरात में गीत गोविन्द संबंधित परम्परा तथा राधातत्त्व – हितांगी ब्रह्मभट्ट के हालिया शोध पर कुछ नोट्स Yogendra Singh Chhonkar 19th June 2023 0 अमनदीप वशिष्ठ गुजरात में कला के विकासक्रम का इतिहास काफ़ी पुराना है और उसमें जैन तथा वैष्णव दोनों ही धाराओं का योगदान रहा है। वहां […]
साहित्य पति की मृत्यु की तैयारी Yogendra Singh Chhonkar 18th October 2024 0 हिंदी कहानी पायल कटियार (हिंदी लेखिका) सावित्री अपने पति को मृत्यु के मुंह से छीनकर निकाल लाती है। यमराज उससे हार जाते हैं और उसके […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 28 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर कमनीय काया और करुण कोमल कंठ का मार्ग में प्रदर्शन करने वाली कंजरी की ओर सिक्का उछालती हुई उसकी फटी बगल से झांकती छाती […]