दो खामोश आंखें – 23 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर मेरी ही बदकिस्मती थी जो न हो सका उनका मुझे अपना बनाना ही तो चाहती थी दो खामोश ऑंखें
साहित्य मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ खाक-पाए फखरेदीं हूँ मैं, अगर्चे शाह हूँ, उनका गुलामे-कमतरी हूँ मैं। बहादुर शाह मेरा नाम है मशहूर आलम में, व लेकिन ऐ […]
साहित्य बुरे काम का बुरा नतीजा Yogendra Singh Chhonkar 4th February 2024 0 हिंदी कहानी पायल कटियार कर्मदंड तो भोगना ही होता है। हमें नहीं तो हम जिन्हें सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं उसे यानी हमारी संतानों को […]
साहित्य भरतपुर राज्य के दरबारी कवि (भाग एक) Yogendra Singh Chhonkar 21st September 2020 0 भरतपुर दरबार ने बड़ी संख्या में कवियों और साहित्यकारों को आश्रय दिया। यहां के अधिकांश शासक साहित्यानुरागी थे। राज्य के संस्थापक राज बदनसिंह स्वयं सरस् […]