दो खामोश आंखें – 9 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जो बेखुदी न दे पाया तेरा मयखाना साकी दे गईं दो खामोश ऑंखें
साहित्य मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ खाक-पाए फखरेदीं हूँ मैं, अगर्चे शाह हूँ, उनका गुलामे-कमतरी हूँ मैं। बहादुर शाह मेरा नाम है मशहूर आलम में, व लेकिन ऐ […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 3 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे जाने का ख्याल मुझे दहशत नहीं देता मत समझना मैं तुम्हे दिल से नहीं लेता न होऊंगा उदास पर करूँगा तलाश […]
साहित्य समाजसेवा के बाहरी आवरण के पीछे एक हृदयहीन औरत की असलियत Yogendra Singh Chhonkar 11th February 2024 0 हिंदी कहानी पायल कटियार समाज सेविका सावित्री देवी की शहर में अच्छी खासी पहचान थी। शहर के तमाम छोटे-बड़े कार्यक्रमों में उन्हें मुख्य अतिथि के […]