दो खामोश आंखें – 9 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जो बेखुदी न दे पाया तेरा मयखाना साकी दे गईं दो खामोश ऑंखें
साहित्य ठेल की किस्मत (एक सब्जी विक्रेता के संघर्ष की दास्तान) Yogendra Singh Chhonkar 26th August 2023 0 कहानी पायल कटियार दीनू सब्जी की ठेल वाले ने अवाज लगाई- आलू, प्याज टमाटर गोभी, पत्ता गोभी, हरी मटर, हरी-हरी सब्जियां ले लो। आवाज सुनते […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 8 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 1 योगेन्द्र सिंह छोंकर पीने को दो घूँट जो रोपी अंजुली उसके गोल घड़े के सामने पाया घड़ा खाली है हर प्यास बुझाने को काफी हैं […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 27 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर अपने बच्चे का निवाला कोयल कुल के कंठ में डालने वाले कौए को सदा ही दुत्कारती हैं दो खामोश ऑंखें