दो खामोश आंखें – 12 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे दिए हैं या खुद के रचे जो भोग रहा हूँ पल बेख्याली के बा ख्याली की हर डगर मिटाती गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 22 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें -32 Yogendra Singh Chhonkar 19th December 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर गणेश जी का दूध पीना सागर जल मीठा होना रोटी प्याज़ वाली डायन कटे बैंगन में ॐ दीवार पर साईं कितनी सहजता […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 13 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जिनके होने का अहसास है दिल का सुकून जिनमे डूबने की हशरत है मेरा जूनून पल में हँसाने और रुलाने वाली खुद को […]