दो खामोश आंखें 7 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर किसी के रूप से होकर अँधा जो मैं भटका जहाँ में जानता हूँ पीठ पर चुभती रहेंगी दो खामोश ऑंखें
साहित्य ब्रज संबंधित तीन शोध पत्र : व्याख्यानों पर मनन अनुचिंतन Yogendra Singh Chhonkar 9th July 2023 0 अमनदीप वशिष्ठ पिछले दिनों श्रीरंगम में वैष्णव धारा पर एक संगोष्ठी हुई जिसमें बहुत विद्वानों ने भाग लिया। उनमें तीन युवा विद्वानों से परिचय रहा […]
साहित्य दो खामोश आंखें पीठ में सुराख किये जाती हैं Yogendra Singh Chhonkar 4th March 2011 1 योगेन्द्र सिंह छोंकर दो खामोश ऑंखें मेरी पीठ में सुराख़ किए जाती हैं! माना इश्क है खुदा क्यों मुझ काफ़िर को पाक किए जाती हैं! भागता हूँ […]
साहित्य मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ खाक-पाए फखरेदीं हूँ मैं, अगर्चे शाह हूँ, उनका गुलामे-कमतरी हूँ मैं। बहादुर शाह मेरा नाम है मशहूर आलम में, व लेकिन ऐ […]