दो खामोश आंखें – 11 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर पते की तो बात क्या नाम तक बताया नहीं एक झलक दिखा कर जो हो गयीं ओझल कैसे ढूढुं कहाँ रहती हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य ब्रज की वर्त्तमान आतंरिक गतिकी – एक बाहरी अध्येता के नोट्स Yogendra Singh Chhonkar 21st August 2023 0 अमनदीप वशिष्ठ ब्रज में पिछले कुछ समय से एक संश्लिष्ट वैचारिक मंथन चल रहा है। इस वैचारिक मंथन का स्वरूप बहुत से कारकों से मिलकर […]
साहित्य ‘अर्थात्’ का अर्थ संधान (पुस्तक समीक्षा) Yogendra Singh Chhonkar 28th June 2024 0 अमनदीप वशिष्ठ अमिताभ चौधरी का काव्य संग्रह ‘अर्थात्’ मूलतः पोएट्री होते हुए भी शिल्प में ‘ट्रैक्टेटस’ की याद दिलाता है। मितकथन और घनत्व उसी तरह […]
साहित्य मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 मुरीदे कुतुबुद्दीन हूँ खाक-पाए फखरेदीं हूँ मैं, अगर्चे शाह हूँ, उनका गुलामे-कमतरी हूँ मैं। बहादुर शाह मेरा नाम है मशहूर आलम में, व लेकिन ऐ […]