विधानसभा चुनाव 1993 और मथुरा जिला

पिछले अंक में हमने जाना कि जिले में भाजपा की राजनीति का ग्राफ बढ़ रहा था और यहां की छह में से तीन सीटों पर उसका कब्जा हो गया था। जनता दल के पास दो सीटें थीं और एक सीट कांग्रेस के पास थी। 1993 कि चुनाव में भी यही आंकड़ा रहा पर कुछ विधायकों के चेहरे बदल गए। गोवर्धन सीट जनता दल के हाथ से निकल कर भाजपा के पास चली गई। मथुरा भाजपा के पास ही रही पर विधायक बदल गए। छाता भाजपा के हाथ से निकल कर जनता दल के खाते में चली गई। गोकुल जनता दल के हाथ से निकलकर भाजपा के खाते में चली गई और सादाबाद भाजपा के हाथ से निकलकर फिर से जनता दल के पास चली गई। सिर्फ मांट की स्थिति पूर्ववत रही।

वर्ष 1993 में हुआ था यह चुनाव

सीटों के नाम और उनके क्रम की बात करें तो इस बार कोई परिवर्तन नहीं हुआ था। आरक्षण की स्थिति भी पूर्ववत गोवर्धन विधानसभा की सीट पर ही थी। सीटों के नाम और उनके क्रम निम्नवत रहे।

  1. गोवर्धन (362) [सुरक्षित]
  2. मथुरा (363)
  3. छाता (364)
  4. मांट (365)
  5. गोकुल (366)
  6. सादाबाद (367)

इस बार मतदान की तिथि थी 18-11-1993।

कुछ इस तरह रहा चुनाव परिणाम

गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र 

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 214237 थी, जिनमें से 49.82% यानी 106740 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 2569 मत निरस्त पाए गए और 104171 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत हासिल की भाजपा के प्रत्याशी अजय कुमार पोइया ने, जिन्हें 45740 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला रहा जनता दल के प्रेम सिंह से, जिन्हें 34439 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के शेर सिंह जिन्हें 11664 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे बसपा के भगवान सिंह जिन्हें 9467 वोट मिले। 

मथुरा विधानसभा क्षेत्र

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 220372थी, जिनमें से 52.30% यानी 115256 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 2062 मत निरस्त पाए गए और 113194 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत दर्ज की भाजपा के प्रत्याशी स्वामी रामस्वरूप शर्मा ने, जिन्हें 55138 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला रहा कांग्रेस के विजय कुमार से, जिन्हें 41042 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे समाजवादी पार्टी के ब्रजेश जिन्हें 7031 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे निर्दलीय विजेंद्र पाल जिन्हें 5023 वोट मिले।

छाता विधानसभा क्षेत्र

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 199141 थी, जिनमें से 59.54% यानी 118560 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 2665 मत निरस्त पाए गए और 115889 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत हासिल हुई जनता दल के ठाकुर तेजपाल सिंह को, जिन्हें 37154 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला रहा भाजपा के प्रत्याशी और पिछले दो बार के विधायक किशोरीश्याम से, जिन्हें 32767 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे सीपीआई के छीतर सिंह जिन्हें 15495 वोट मिले। बसपा के मोहम्मद मकसूद चौथे स्थान पर रहे जिन्हें 11372 वोट मिले। पांचवें स्थान पर रहे निर्दलीय बिजन सिंह जिन्हें 6011 वोट मिले। छठवें स्थान पर रहे कांग्रेस के ओमप्रकाश तोमर जिन्हें 5154 वोट मिले।

मांट विधानसभा क्षेत्र

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 196626 थी, जिनमें से 60.33% यानी 118627 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 3764 मत निरस्त पाए गए और 114780 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत दर्ज की कांग्रेस के प्रत्याशी और पिछले दो बार के विधायक श्यामसुंदर शर्मा ने, जिन्हें 42995 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला जनता दल के प्रत्याशी और पूर्व विधायक कुशलपाल सिंह से रहा, जिन्हें 37355 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे भाजपा के पदम् सिंह शर्मा जिन्हें 16942 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे बसपा के हर्ष कुमार बघेल जिन्हें 12911 वोट मिले।

गोकुल विधानसभा क्षेत्र

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 200214 थी, जिनमें से 53.26% यानी 106634 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 3582 मत निरस्त पाए गए और 103052 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत हासिल हुई भाजपा के प्रत्याशी प्रणतपाल सिंह को, जिन्हें 29999 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला रहा सपा के प्रत्याशी और पूर्व में विधायक रहे सरदार सिंह से, जिन्हें 22145 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे जनता दल के प्रत्याशी और पूर्व में छाता सीट से विधायक रहे चौधरी लक्ष्मी नारायण जिन्हें 19698 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी और पिछले बार के विधायक नबाव सिंह जिन्हें 14772 वोट मिले। कांग्रेस के दरयाव सिंह पांचवें स्थान पर रहे जिन्हें 5199 वोट मिले।

सादाबाद विधानसभा क्षेत्र

इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 197257 थी, जिनमें से 54.55% यानी 107609 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। डाले गए मतों में से 3551 मत निरस्त पाए गए और 104058 मत वैध पाए गए। इस सीट पर जीत हासिल की जनता दल के प्रत्याशी विश्वम्भर सिंह ने, जिन्हें 31121 वोट मिले। इनका मुख्य मुकाबला रहा सपा के भूप सिंह से, जिन्हें 30694 वोट मिले। तीसरे स्थान पर रहे भाजपा के प्रत्याशी और पिछले बार के विधायक बिजेंद्र सिंह, जिन्हें 28746 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे कांग्रेस के कालीचरण, जिन्हें 9023 वोट मिले। 

एक नजर चुनाव परिणाम पर

इस बार संख्याबल के लिहाज से पिछले बार जैसी ही स्थिति रही पर जिसमें भाजपा तीन, जद दो व कांग्रेस एक सीट पर थी। पर अधिकांश विधायक बदले हुए थे। गोवर्धन सीट पर पिछले विधायक पूरन प्रकाश के स्थान पर जनता दल ने प्रेम सिंह को प्रत्याशी बनाया जो भाजपा के अजय कुमार पोइया के सामने हार गए। मथुरा सीट पर भाजपा ने अपने दो बार के विधायक रविकांत गर्ग का टिकट काट कर प्रसिद्ध रासचार्य स्वामी रामस्वरूप शर्मा को टिकट दे दिया जो चुनाव जीत गए, यहां कांग्रेस ने भी अपने पूर्व विधायक प्रदीप माथुर को का टिकट काट कर विजय कुमार को दिया था। कांग्रेस की इस उठापटक का लाभ भाजपा के स्वामी को मिल गया। छाता सीट पर मुकाबला पिछले प्रतिद्वंद्वियों के बीच ही रहा। यहां भाजपा के विधायक किशोरीश्याम जनता दल के ठाकुर तेजपाल सिंह के सामने चुनाव हार गए। मांट सीट पर कांग्रेस के श्यामसुंदर शर्मा ने अपनी जीत को फिर से दोहराया। गोकुल सीट पर जनता दल ने अपने विधायक नबाव सिंह का टिकट काट कर पूर्व में छाता से विधायक रहे चौधरी लक्ष्मी नारायण को दे दिया, पर इस चुनाव में नबाव सिंह ने निर्दलीय पर्चा भर दिया। जिसके कारण दोनों का गणित गड़बड़ा गया और जीत मिली भाजपा के प्रणतपाल सिंह को और दूसरे स्थान पर सपा के सरदार सिंह रहे। सादाबाद सीट पर जनता दल ने अपने प्रत्याशी मुस्तमन्द अली खान ‘छावी मियां’ का टिकट काट कर विशम्बर सिंह को दे दिया जिसका उसे लाभ मिला और सीट जनता दल को मिल गई।

विधायकों का परिचय

विधायक अजय कुमार पोइया (गोवर्धन)

अजय कुमार पोइया

विधायक अजय कुमार पोइया का जन्म 6 जुलाई 1955 को मथुरा में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री हीरालाल था। आपने स्नातकोत्तर, एलएलबी तक शिक्षा प्राप्त की थी। 1978 में आपका विवाह श्रीमती चंद्रवती के साथ हुआ था। आपका व्यवसाय वकालत था। महंगाई, भ्रष्टाचार विरोधी तथा श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में विभिन्न धाराओं के अंतर्गत आप मथुरा, एटा व दिल्ली जेल में बंदी रहे। तीन वर्ष तक डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष, चार वर्ष तक अखिल भारतीय स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष, छह वर्ष तक अनुसूचित जाति छात्र संघ तथा अनुसूचित जाति मोर्चा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। पांच वर्ष तक अनुसूचित जाति छात्र बेरोजगार युवक कर्मचारी समन्वय समिति मथुरा के महामंत्री तथा आठ वर्ष तक भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री भी रहे हैं। वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर गोवर्धन सीट से आप विधानसभा चुनाव लड़े जिसमें जनता दल के पूरन प्रकाश के सामने हार मिली। वर्ष 1993 में आप गोवर्धन सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जनता दल के प्रेम सिंह को हराकर विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में आप गोवर्धन सीट से भाजपा के टिकट पर फिर से चुनाव लड़े और बसपा के प्रताप सिंह को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2002 में भाजपा के आपको टिकट नहीं मिली और आप इंडियन नेशनल लोकदल के टिकट पर गोवर्धन सीट से चुनाव लड़े और भाजपा के श्याम सिंह अहेरिया के सामने पराजित हुए। वर्ष 2007 में आप गोवर्धन सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े पर रालोद के पूरन प्रकाश के सामने पराजित हुए। वर्ष 2012 में आप बलदेव सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े पर रालोद के पूरन प्रकाश के सामने एक बार फिर पराजित हुए। सामाजिक कार्यों में आपकी विशेष रुचि थी। 

विधायक राम स्वरूप शर्मा (मथुरा)

रामस्वरूप शर्मा

विधायक रामस्वरूप शर्मा का जन्म 21 सितम्बर 1931 को मथुरा जिले के कमई गांव में हुआ था। आपके पिता का नाम श्री स्वामी मेघश्याम था। आपने स्नातक समकक्ष रास संगीताचार्य की शिक्षा प्राप्त की थी। 1957 में आपका विवाह श्रीमती श्री शर्मा के साथ हुआ। आप श्रीकृष्ण लीला संस्थान एवं ब्रज ललित कला संस्थान के आजीवन अध्यक्ष रहे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के आजीवन ट्रस्टी तथा ब्रज संगीत न्यास परिषद के आजीवन संरक्षक रहे। श्याम सुधा नाम से आपकी एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई थी। आप मानस सम्मान मध्यप्रदेश-मानस गायनाचार्य तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत रासचार्य उपाधि के सम्मानित हुए थे। विश्व रामायण सम्मेलन हेतु भारत सरकार की ओर से सांस्कृतिक दल के नेता के रूप में मॉरीशस, थाईलैंड, कनाडा, अमेरिका आदि देशों का भ्रमण करने गए थे। दूरदर्शन और आकाशवाणी के आप ए श्रेणी के कलाकार थे। वर्ष वर्ष 1993 में आप मथुरा सीट से भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े और कांग्रेस के विजय कुमार को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में एक बार फिर आप भाजपा के टिकट पर मथुरा सीट से लड़े और कांग्रेस के विजय कुमार को हराकर दूसरी बार विधायक बने।

संगीत, नृत्य, साहित्य, अध्ययन एवं अध्यापन में आपकी विशेष रुचि थी। आपका मुख्यावास विद्यापीठ चौराहा, वृंदावन, मथुरा में था।

विधायक तेजपाल सिंह (छाता)

तेजपाल सिंह

विधायक तेजपाल सिंह का जन्म 5 सितंबर 1949 को मथुरा जिले की छात्रा तहसील के गांव बिडोरा में हुआ। आपके पिता का नाम श्री लोहरे सिंह था। आपने इलाहाबाद एवं आगरा विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल की। वर्ष 1977 में आपका विवाह श्रीमती सुधा सिंह के साथ हुआ। आप अध्यापक भी रहे हैं। वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान आप डीआईआर के अंतर्गत तीन मास तक जिला कारागार मथुरा में बंदी रहे हैं। वर्ष 1989-91 तक जनता दल के जिलाध्यक्ष, 1991-93 तक लोक दल के जिलाध्यक्ष व 1996-2000 तक समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। आपका व्यवसाय कृषि एवं व्यापार है। वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में आप छाता सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े पर भाजपा के किशोरी श्याम के सामने सफलता नहीं मिली। वर्ष 1993 में आप जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े और भाजपा के किशोरी श्याम को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में आप समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और कांग्रेस के लक्ष्मीनारायण के सामने पराजित हुए। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में आप रालोद के टिकट पर लड़े और लोकतांत्रिक कांग्रेस के प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2007 में आप फिर से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े पर बसपा के लक्ष्मीनारायण के सामने हार गए। वर्ष 2012 के चुनाव में आप फिर से रालोद के टिकट पर लड़े और बसपा के लक्ष्मीनारायण को हराकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2017 के चुनाव में आपने भाग नहीं लिया। वर्तमान में आप 2022 के चुनाव में रालोद के टिकट पर प्रत्याशी हैं। वर्ष 1993-96 तक आप प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे हैं। अक्टूबर 2002-मई 2003 तक आप मायावती के मंत्रिमंडल में लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री रहे हैं। अक्टूबर 2003-जुलाई 2004 तक आप मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में सिंचाई विभाग के राज्यमंत्री रहे हैं। 2006-07 तक आप सरकारी आश्वासन समिति के सदस्य रहे हैं। 2012-13 तक आप प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे हैं। जनसेवा में आपकी विशेष रुचि है।

विधायक श्यामसुंदर शर्मा (मांट)

श्यामसुंदर शर्मा

विधायक श्यामसुंदर शर्मा का जन्म 15 जुलाई 1952 को मथुरा जिले के मांट तहसील के पचहरा गांव में हुआ। मांट सीट से पूर्व में विधायक रहे लोकमणि शर्मा आपके पिता थे। आपने स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल की। वर्ष 1976 में आपका विवाह श्रीमती सुधा शर्मा के साथ हुआ। आप जिला सहकारी बैंक लिमिटेड मथुरा तथा जिला सहकारी संघ लिमिटेड मथुरा के प्रशासक और सभापति रह चुके हैं। वर्ष 1989 के चुनाव में आप मांट सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जनता दल के कुशलपाल सिंह को हराकर प्रथम बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1991 के चुनाव में आप पुनः मांट सीट से कांग्रेसनक टिकट पर लड़े और जनता दल के कुशलपाल सिंह को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1993 के चुनाव में मांट सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जनता दल के कुशलपाल सिंह को हराकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में आप मांट सीट से कांग्रेस (तिवारी) के टिकट पर लड़े और बसपा के हर्ष कुमार बघेल को हराकर चौथी बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2002 के चुनाव में आप मांट सीट से लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर लड़े और बसपा के चौधरी प्रताप सिंह को हराकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2007 के चुनाव में आप मांट सीट से लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर लड़े और रालोद के रामपाल सिंह को हराकर छठवीं बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में आप मांट सीट पर तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और रालोद के जयंत चौधरी के सामने चुनाव हार गए। जयंत चौधरी द्वारा विधानसभा से त्यागपत्र दिए जाने के बाद 2012 में ही हुए उपचुनाव में आप तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़े और रालोद के योगेश नौहवार को हराकर सातवीं बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2017 के चुनाव में आप मांट सीट पर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और रालोद के योगेश नौहवार को हराकर आठवीं बार विधानसभा पहुंचे। वर्तमान में 2022 के विधानसभा चुनाव में आप मांट सीट पर बसपा से प्रत्याशी हैं। वर्ष 1993 में आप अखिल भारतीय कांग्रेस विधान मण्डल के मुख्य उप सचेतक, 1997 में लोक लेखा समिति के सदस्य, 1997 में कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में खेलकूद, युवा कल्याण, प्रांतीय विकास दल आदि विभागों के मंत्री, 1999 में रामप्रकाश गुप्ता मंत्रीमंडल में होमगार्ड्स, राजनैतिक पेंशन, नागरिक सुरक्षा आदि विभागों के मंत्री, 2000 में राजनाथ सिंह मंत्रिमंडल में  होमगार्ड्स, राजनैतिक पेंशन, नागरिक सुरक्षा आदि विभागों के मंत्री, 2002 में मायावती मंत्रिमंडल में उच्च शिक्षा मंत्री एवं 2007 में प्राक्कलन समिति के सभापति बनाये गए। समाजसेवा, सहकारिता और ग्राम विकास में इनकी विशेष रुचि है। 

विधायक प्रणतपाल सिंह (गोकुल)

प्रणतपाल सिंह

विधायक प्रणतपाल सिंह का जन्म 30 नवम्बर 1965 को मथुरा जिले के राया ब्लॉक के गांव तिरवाया में हुआ। इनके पिता का नाम श्री उमराव सिंह था। आपने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। 1984 में आपका विवाह श्रीमती फूलवती देवी के साथ हुआ। आपका व्यवसाय कृषि है। 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान आप जिला कारागार एटा में दो मास तक बंदी रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मथुरा के संघ शिक्षा वर्ग 1982 में, 1982-84 तक सरस्वती शिशु मंदिर मांट तहसील के संयोजक, 1984-86 तक हिन्दू जागरण मंच मथुरा के जिला संयोजक, 1986-91 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा मथुरा के जिला मंत्री, 1991-93 तक भारतीय जनता किसान मोर्चा मथुरा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। 1989 में आप पहली बार गोकुल सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली और चौथे स्थान रहे। 

विधायक विशम्बर सिंह (सादाबाद)

विशम्बर सिंह

विधायक विशम्बर सिंह का जन्म मथुरा जिले के गोविंदपुर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री कन्हैया लाल था। इन्होंने हाई स्कूल तक शिक्षा पाई थी। वर्ष 1968 में इनका विवाह श्रीमती शांतिदेवी के साथ हुआ था। इनका व्यवसाय कृषि था। 1982 से 88 तक ये ग्राम सभा कंजौली के ग्राम प्रधान रहे। 1988 में ये क्षेत्र समिति सादाबाद के ब्लॉक प्रमुख बने। वर्ष 1993 के चुनाव में ये जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े और सपा के भूप सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने। वर्ष 1996 में इन्होंने भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और बसपा के अरविंद कुमार को हराकर दूसरी बार विधायक बने। 

(आंकड़े निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिये गए हैं)

विधानसभा चुनाव 1991 और मथुरा जिला

पिछले अंक में हमने जाना कि 1989 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मथुरा जिले की दो सीटों को जीत […]

विधानसभा चुनाव 1996 और मथुरा जिला

पिछले अंक में हमने जाना कि जिले की राजनीति में भाजपा की मजबूती स्थायी होती जा रही थी। जनता दल […]

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