दो खामोश आंखें -33 Posted on 19th December 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर घर कहाँ मंदिर के सामने मंदिर कहाँ घर के सामने दोनों कहाँ आमने सामने कुछ बता कर नहीं देती हैं दो खामोश आँखें
साहित्य अँधेरे में लोकतंत्र : आपातकाल का साहित्यिक दस्तावेज़- डॉ. धर्मराज Yogendra Singh Chhonkar 8th October 2025 0 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल वह कालखंड है, जिसे अंधकार, दमन और भय का पर्याय माना जाता है। यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं […]
साहित्य मेरी बेटी (मां और बेटी के प्रेम का दर्पण) Yogendra Singh Chhonkar 17th June 2024 0 (पायल कटियार) बेटी पाकर धन्य हो गई जब से वह बड़ी हो गई मैं टेंशन फ्री हो गई मानो जिम्मेदारी से मुक्त हो गईजब से […]
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]