दो खामोश आंखें – 18 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर देख बर्तन किसी गरीब के चढ़ते सट्टे की बलि आखिर क्यों नहीं सुलगती दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 20 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख […]
साहित्य मथुरा का गांधी — कन्हैया लाल गुप्त Yogendra Singh Chhonkar 15th April 2024 0 एक किस्सा नायाब अशोक बंसल मथुरा में जोर-जुल्म की आपातकालीन हुकुमत को जबर्दस्त टक्कर देने वाले कन्हैयालाल गुप्त वृन्दावन की एक गली में रहे और […]
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]