दो खामोश आंखें – 22 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य बनी ठनी प्रेमकथा से चित्रकला तक Yogendra Singh Chhonkar 13th October 2021 0 भारतीय चित्रकला की लघु चित्र शैली के जानकारों में ऐसा कौन होगा जो ‘बनी-ठनी’ को न जानता हो! पर वह महिला जो इस शैली की […]
साहित्य टिफिन (पेट भरने के लिये जूठन खाने को मजबूर एक वृद्धा की करुण कहानी) Yogendra Singh Chhonkar 6th October 2023 0 कहानी पायल कटियार रागिनी को बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि किट्टू (उसका बेटा) अब अपना पूरा लंच फिनिश कर लेता है। पहले तो रोज […]
साहित्य श्री शिव चालीसा Yogendra Singh Chhonkar 29th April 2020 0 ।।दोहा। । श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल […]