दो खामोश आंखें – 5 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर हो जाऊं जहाँ के लिए मसीहा या फिर कातिल मैं क्या हूँ जानती हैं बखूबी दो खामोश ऑंखें
साहित्य पूर्वजन्म के कर्ज की वसूली Yogendra Singh Chhonkar 3rd March 2024 0 (कहते हैं अपने पापों की सजा आदमी को इसी जीवन में भुगतनी पड़ती है) हिंदी कहानी पायल कटियार शादी के दस साल बीत जाने पर […]
साहित्य शायर कहो नज़ीर कहो आगरे का है… Yogendra Singh Chhonkar 8th September 2020 0 नजीर अकबराबादी! एक ऐसा शायर जिसकी रचनाएं अवाम की आवाज बुलन्द करती हैं। नजीर उस दौर के इकलौते शायर हैं जिनकी शायरी दरबारों के […]
साहित्य दो खामोश आंखें पीठ में सुराख किये जाती हैं Yogendra Singh Chhonkar 4th March 2011 1 योगेन्द्र सिंह छोंकर दो खामोश ऑंखें मेरी पीठ में सुराख़ किए जाती हैं! माना इश्क है खुदा क्यों मुझ काफ़िर को पाक किए जाती हैं! भागता हूँ […]