दो खामोश आंखें – 30 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर ज़बर के जूतों तले मसली जाने के बाद ज़माने के साथ साथ खुद अपनी आँखों से भी गिर जाती हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 21 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर कभी भटकाती कभी राह दिखाती कभी छिप जाती कभी आकर सामने अपनी ओर बुलाती मुझसे है खेलती या मुझे खिलाती दो खामोश […]
साहित्य राधा के प्रेम ने ब्रज के गोपाल को बनाया श्रीकृष्ण Yogendra Singh Chhonkar 22nd September 2023 0 राधाष्टमी पर विशेष विवेक दत्त मथुरिया ब्रज श्रीराधा के नाम से नारी सशक्तिकरण का सर्वोच्च केंद्र हैं। यहां स्त्री की स्वतंत्र सत्ता के रूप में […]
साहित्य गुजरात में गीत गोविन्द संबंधित परम्परा तथा राधातत्त्व – हितांगी ब्रह्मभट्ट के हालिया शोध पर कुछ नोट्स Yogendra Singh Chhonkar 19th June 2023 0 अमनदीप वशिष्ठ गुजरात में कला के विकासक्रम का इतिहास काफ़ी पुराना है और उसमें जैन तथा वैष्णव दोनों ही धाराओं का योगदान रहा है। वहां […]