दो खामोश आंखें – 29 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर चंद गहने रुपये रंगीन टीवी या किसी दुपहिया की खातिर जल भी जाती हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य जीवन दर्शन Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 जीवन दर्शन कंक्रीट के इस जंगल में आपाधापी के इस दंगल में आधुनिकता की होड़ में दौलत की अंधी दौड़ में आज हर इन्सान भूल […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 28 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर कमनीय काया और करुण कोमल कंठ का मार्ग में प्रदर्शन करने वाली कंजरी की ओर सिक्का उछालती हुई उसकी फटी बगल से झांकती छाती […]
साहित्य ब्रज संबंधित तीन शोध पत्र : व्याख्यानों पर मनन अनुचिंतन Yogendra Singh Chhonkar 9th July 2023 0 अमनदीप वशिष्ठ पिछले दिनों श्रीरंगम में वैष्णव धारा पर एक संगोष्ठी हुई जिसमें बहुत विद्वानों ने भाग लिया। उनमें तीन युवा विद्वानों से परिचय रहा […]