दो खामोश आंखें – 26 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर ऊपर से एक वचन नीचे से बहु वचन बताती हैं पैजामे को पर देख लहंगे को पशोपेश में पड़ जाती हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 30 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर ज़बर के जूतों तले मसली जाने के बाद ज़माने के साथ साथ खुद अपनी आँखों से भी गिर जाती हैं दो खामोश […]
साहित्य बुरे काम का बुरा नतीजा Yogendra Singh Chhonkar 4th February 2024 0 हिंदी कहानी पायल कटियार कर्मदंड तो भोगना ही होता है। हमें नहीं तो हम जिन्हें सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं उसे यानी हमारी संतानों को […]
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]