दो खामोश आंखें – 16 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर सामने रहकर न हुआ कभी जिस प्यास का अहसास उसे बुझाने दुबारा कभी मेरे पहलु में आएँगी दो खामोश ऑंखें
साहित्य दो खामोश आंखें – 13 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जिनके होने का अहसास है दिल का सुकून जिनमे डूबने की हशरत है मेरा जूनून पल में हँसाने और रुलाने वाली खुद को […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 20 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 28 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर कमनीय काया और करुण कोमल कंठ का मार्ग में प्रदर्शन करने वाली कंजरी की ओर सिक्का उछालती हुई उसकी फटी बगल से झांकती छाती […]