दो खामोश आंखें – 1 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar कैसे लिखूं मैं वो प्यारे पल जिनका साक्षी मैं और दो खामोश ऑंखें
साहित्य सपना – एक महिला के अंतहीन संघर्ष की गाथा Yogendra Singh Chhonkar 29th August 2023 0 कहानी पायल कटियार कभी कभी जिंदगी वह सब करने के लिए मजबूर कर देती है जिसे मनुष्य करना नहीं चाहता है। लेकिन कहते हैं मजबूरी […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 30 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर ज़बर के जूतों तले मसली जाने के बाद ज़माने के साथ साथ खुद अपनी आँखों से भी गिर जाती हैं दो खामोश […]
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]