दो खामोश आंखें – 9 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जो बेखुदी न दे पाया तेरा मयखाना साकी दे गईं दो खामोश ऑंखें
साहित्य शायर कहो नज़ीर कहो आगरे का है… Yogendra Singh Chhonkar 8th September 2020 0 नजीर अकबराबादी! एक ऐसा शायर जिसकी रचनाएं अवाम की आवाज बुलन्द करती हैं। नजीर उस दौर के इकलौते शायर हैं जिनकी शायरी दरबारों के […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 6 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर अपनी अपनी वासनाओं में हस्तमैथुनरत दुनिया में बेइरादा डोलती कुछ बावरी भी हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]