दो खामोश आंखें – 12 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर तेरे दिए हैं या खुद के रचे जो भोग रहा हूँ पल बेख्याली के बा ख्याली की हर डगर मिटाती गयीं दो खामोश ऑंखें
साहित्य वक्त कहां किसी की सुनने को Yogendra Singh Chhonkar 4th July 2023 0 कहानी पायल कटियार मैं प्रतिदिन की भांति अपने ऑफिस से घर के लिए जा रही थी। इस बीच जैसा मेरी दिनचर्या में शामिल था कि […]
साहित्य श्रीकृष्ण के कर्मयोग की प्रेम प्रेरणा हैं श्रीराधा Yogendra Singh Chhonkar 12th September 2021 0 फोटो साभार इन्टरनेट
साहित्य दो खामोश आंखें – 22 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जाकर मुझ से दूर न छीन पायीं मेरा सुकूं शायद इसलिए मुझसे दूर हो गयीं दो खामोश ऑंखें