मजदूर के लिए 1 Posted on 5th March 20113rd March 2019 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर लाल किला है लाल लहू से मेरे ताज महल का संगेमरमर मेरे पसीने से चिपका है
साहित्य श्री हनुमान चालीसा Yogendra Singh Chhonkar 28th April 2020 0 दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । […]
साहित्य कोई क्या किसी से लगाये दिल Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 कभी बन-संवर के जो आ गये तो बहारे हुस्न दिखा गये, मेरे दिल को दाग़ लगा गये, यह नया शगूफ़ा खिला गये। कोई क्या किसी […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 23 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर मेरी ही बदकिस्मती थी जो न हो सका उनका मुझे अपना बनाना ही तो चाहती थी दो खामोश ऑंखें