दो खामोश आंखें – 6 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर अपनी अपनी वासनाओं में हस्तमैथुनरत दुनिया में बेइरादा डोलती कुछ बावरी भी हैं दो खामोश ऑंखें
साहित्य गुलदस्ता Yogendra Singh Chhonkar 21st June 2023 0 कहानी (पायल कटियार) आज मैडम ने आखिर गुलदस्ता क्यों मंगवाया है? आज तो कोई ओकेशन भी नहीं है। सभी के मन में यह विचार में […]
साहित्य कोई क्या किसी से लगाये दिल Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 कभी बन-संवर के जो आ गये तो बहारे हुस्न दिखा गये, मेरे दिल को दाग़ लगा गये, यह नया शगूफ़ा खिला गये। कोई क्या किसी […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 21 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर कभी भटकाती कभी राह दिखाती कभी छिप जाती कभी आकर सामने अपनी ओर बुलाती मुझसे है खेलती या मुझे खिलाती दो खामोश […]