दो खामोश आंखें – 20 Posted on 2nd February 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख पाऊँ दो खामोश ऑंखें
साहित्य ननद भाभी के रिश्ते की समझ Yogendra Singh Chhonkar 31st August 2023 0 कहानी पायल कटियार गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली थीं। वर्षा हर साल की तरह इस बार भी गर्मी की छुट्टियों में मायके पहुंचने की […]
साहित्य सपनों का आशियाना Yogendra Singh Chhonkar 25th June 2023 0 कहानी पायल कटियार पूजा अपने घर में दो भाईयों के बीच अकेली बहन थी। उसके पिता एक कपड़ा व्यापारी थे। अच्छा खासा परिवार था। किसी […]
साहित्य गोपियों के कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतिफल है-महारास Yogendra Singh Chhonkar 16th October 2024 0 रासोत्सव: सम्प्रवृत्तो गोपीमण्डल मण्डित:। योगेश्वर कृष्णेन तासां मध्ये द्वयोद्वयो: प्रविष्टेन गृहितानां काण्ठे स्वनिकटं स्त्रियः।। गोपाल शरण शर्मा गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्यतम भक्त है। भक्ति […]