दो खामोश आंखें – 10 Posted on 28th January 2011 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर अभाव के ईंधन से भूख की आग में जलते इंसानों की देख बेबसी क्यों नहीं बरसती दो खामोश ऑंखें
साहित्य ठेल की किस्मत (एक सब्जी विक्रेता के संघर्ष की दास्तान) Yogendra Singh Chhonkar 26th August 2023 0 कहानी पायल कटियार दीनू सब्जी की ठेल वाले ने अवाज लगाई- आलू, प्याज टमाटर गोभी, पत्ता गोभी, हरी मटर, हरी-हरी सब्जियां ले लो। आवाज सुनते […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 31 Yogendra Singh Chhonkar 4th March 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर मंदिर हो या कोई मजार किसी नदी का पुल हो, कटोरा किसी भिखारी का या शाहजहाँ की कब्र एक ही भाव सिक्का फैंकती है […]
साहित्य कोई क्या किसी से लगाये दिल Yogendra Singh Chhonkar 18th July 2020 0 कभी बन-संवर के जो आ गये तो बहारे हुस्न दिखा गये, मेरे दिल को दाग़ लगा गये, यह नया शगूफ़ा खिला गये। कोई क्या किसी […]