मजदूर के लिए 1 Posted on 5th March 20113rd March 2019 by Yogendra Singh Chhonkar योगेन्द्र सिंह छोंकर लाल किला है लाल लहू से मेरे ताज महल का संगेमरमर मेरे पसीने से चिपका है
साहित्य सीमा रेखा के पार Yogendra Singh Chhonkar 22nd June 2023 0 कहानी पायल कटियार तेज वेग से बहती लहरों में आज एक उस कहानी का अंत हो गया जिसके चर्चे दूर-दूर तक फैले हुए थे। दर्दनाक […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 20 Yogendra Singh Chhonkar 2nd February 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख […]
साहित्य दो खामोश आंखें – 10 Yogendra Singh Chhonkar 28th January 2011 0 योगेन्द्र सिंह छोंकर अभाव के ईंधन से भूख की आग में जलते इंसानों की देख बेबसी क्यों नहीं बरसती दो खामोश ऑंखें