दो खामोश आंखें – 20 Yogendra Singh Chhonkar 16 years ago योगेन्द्र सिंह छोंकर जी जाऊं पी विसमता विष रस समता बरसाऊँ रहे सदा से रोते जो उनको जाय हसाऊँ जो एक बार फिर से देख पाऊँ दो खामोश ऑंखें