दो खामोश आंखें – 17 Yogendra Singh Chhonkar 16 years ago योगेन्द्र सिंह छोंकर करने को सुबह शाम क्यों देती हो होठों को थिरकन हो जाएगी दिन से रात जो एक बार पलक झुका लें दो खामोश ऑंखें